वो शाम भी अजीब थी, ये शाम भी अजीब है -...


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हो रही तेरी.

विमल चुप हो गया .और चेहरा नीचे झुकाए सोचने लगा .आख़िर क्या हो गया है इसे...

कविता का सारा ध्यान ..राजेश पे जा चुका था.वो भूल ही गयी थी के सब खाना खाने आए हुए हैं.सबकी बातें हो रही थी आपस में पर सबने आवाज़ बहुत धीमी रखी हुई थी.बस कविता एक दम चुप हो गयी थी..खो गयी थी कहीं..

सुनील..क्या हुआ कवि कहाँ खो गयी ...( सुनील कुछ ज़ोर से बोला था .)

कविता..आन आन कुछ नहीं भाई ....और खाना खाने लगी आनमन से...

राजेश ने सुनील और कवि की आवाज़ पहचान ली ...दिल ज़ोर से धड़कने लगा .उसे अपना वादा याद आ गया कविता से जो उसने किया था..

राजेश...यार यहाँ का आ/सी साला काम नहीं कर रहा .चल उठ कहीं और चलते हैं...तू बिल दे का फटाफट ..मैं बाहर इंतजार कर रहा हूँ..

विमल..आबे ये ड्रिंक तो खत्म.

राजेश .चल ना... ( और उठ के एक दम बाहर निकल गया ..उसने एक नज़र भी मुदके नहीं देखा की कविता कहाँ बैठी हुई है .)

कविता की नजरें.उसका पीछा करती रही .सभी कविता को देख रहे थे पर कोई कुछ ना बोला..

विमल .ये साले को हो क्या गया है ..झल्लता हुआ उठा और उसकी नज़र कविता और सारे परिवार पे पड़ गयी ..एक पल कविता को देखा और दूसरे पल बाहर जाते राजेश को...

फटाफट भगा.बिल पे किया और दूर से बाहर ...

विमल.अरे भाभी तो अंदर है पूरी फॅमिली के साथ.

राजेश.चुप चाप चल ..

विमल..पर.

राजेश.कहा ना चुप चाप चल....और राजेश विमल को किसी दूसरे बार में ले गया..

विमल...भाभी वहाँ थी .पूरा परिवार था और तू मिला नहीं..तू मुझ से कुछ छुपा रहा है ..जब से भाभी दिल्ली आई है तू रोज पीने लग गया ..साला बॉटल तक डकार जाता है ..तुझे मेरी कसम..सच बता .मेरा दिल घबरा रहा है ..

राजेश .एक फीकी हंसी के साथ ...जिस रास्ते पे जाना नहीं उसकी बात क्यों करे..बस यही तक का साथ था हमारा .अब इससे आगे कुछ मत पूछना.मैं बता नहीं सकूँगा..

विमल..यहीं तक का साथ ...ज़ूमा ज़ूमा 10 दिन नहीं हुए शादी को .और यहीं तक का साथ...

राजेश ...देख अगर तू मेरा दोस्त है..तो आज के बाद तू कभी भी कविता के बारे में कोई बात नहीं करेगा ...वरना अपनी दोस्ती यहीं खत्म...

विमल..कैसा दोस्त है रे तू ..और तू क्या समझता है मैं पत्थर का बना हूँ..ये ये जो तू अपना हाल कर रहा है मुझ से देखा नहीं जाता ..और तू मुझे इतना बेगाना समझता है के पूरी बात तक नहीं बता सकता.यही दोस्ती है तेरी .दिल करता है अभी एक कान के नीचे दम.

राजेश..क्यों बार बार मेरे झखमो को कुरेद रहा है ..क्यों मेरे घाव हारे कर रहा है .जीने दे यार कुछ दिन...

अब विमल चुप हो गया..लेकिन उसने फैसला कर लिया था की कविता ना सही .वो सुनील या सोनल से जरूर बात करेगा..आख़िर ऐसा क्या हो गया.

राजेश चला गया .सब उसे जाता हुआ देखते रहे .रूबी ने एक बार उठने की कोशिश करी पर साथ बैठी सोनल ने उसका हाथ पकड़ हिलने नहीं दिया...

सुनील.क्या हुआ कवि...तुम इतना क्यों परेशान हो रही हो...जिंदगी में कई ऐसे मौके आएँगे जब तुम्हारा टकराव उससे बिना चाहे होगा ..तो क्या यूँ ही परेशान होती रहोगी.जिस रास्ते पे चलना तुम्हारा दिल गवारा नहीं करता .तो उस रास्ते पे और कोन कोन है.उसके लिए तुम क्यों फिक्र कर रही हो.भूल जाओ सब और अपने कैरियर पे ध्यान दो.

कविता..भाई

मज़ेदार सेक्स कहानियाँ

- December 5, 2015- November 30, 2015- February 6, 2016- January 5, 2016- July 9, 2016

सुमन..बेटा वो ठीक कह रहा है...मैं जानती हूँ.शुरू में बहुत तकलीफ होगी .पर तुम्हें इसकी आदत डालनी पड़ेगी ...और कोई रास्ता नहीं है..

सुनील.मैं तो अपने लिए वाइन मंगवा रहा हूँ..अन्य टेकर्स..

कविता ..भाई मैं भी लूँगी...

सुनील...तुम..रहने दो..प्लीज़ नहीं पचा पाएगी.उस दिन..

सोनल...इस के लिए बस एक छोटा.चलो रहने दो.ये मेरे साथ शेयर कर लेगी. (बीच में ही बात काट दी .ताकि कविता को बुरा ना लगे)

सबने थोड़ी वाइन पी..और चलते चलते सुमन बोली..अरे मैं तो बताना ही भूल गयी.कल मेरी सहेली की बेटी का बर्तडे है.बहुत ज़ोर दे रही है .की सबको आना पड़ेगा ..तो कल शाम सब फ्री रखना...

फिर सब घर की तरफ चल पड़े...
सुमन और सागर कभी भी बच्चों को अपने दोस्तों के घर नहीं ले कर गये थे ..दोनों ने बच्चों को बड़ी सकती से पाला था और बच्चों का ध्यान सिर्फ़ पढ़ाई पे ही लगाया था...यही वजह थी की सुनील और सोनल ने कभी कोई ग/फ.भी/फ नहीं बनाया था .इनका मकसद बस अवाल दर्ज़े क्या सिर्फ़ टॉप करना होता था और हमेशा करते थे ..

सुमन की सहेली सिमरन इस बात का हमेशा गीला करती थी ...पर अपने बच्चों के रिज़ल्ट देख और सुमन के बच्चों के रिज़ल्ट देख चुप रही जा करती थी ...लेकिन अब बच्चे बारे हो चुके थे .कैरियर का रास्ता तय हो चुका था...इस बार तो उसने है तोबा कर ली थी...सिमरन का पति एक बिनेसमेन था और उसका मुंबई बहुत आना जाना होता था....

सुमन जब सब को ले कर सिमरन के घर पहुँची तो ..सिमरन को तो हार्ट अटॅक ही होने वाला था

सिमरन..सूमी.ये .ये.
इस से पहले सिमरन कुछ आगे बोलती ..सुमन ने उसके कान में सिर्फ़ इतना बोला ..बाद में.अकेले में ..सब बता दूँगी..

गनीमत ये थी के सिमरन ...डॉक्टर नहीं थी.वो सुमन की बचपन की सहेली थी...वरना शहर का हर डॉक्टर यहाँ होता ..और सुमन के लिए मुश्किलें बाद जाती...

पार्टी में कोई ऐसा नहीं था .जो दोनों को जानता था...

सिमरन के बेटे जयंत की नज़र जब रूबी पे पड़ी ..वो तो वहीं जम के रही गया था..हाथ में सॉफ्ट ड्रिंक्स की ट्रे पकड़े हुए ...और सिमिरन इंतजार कर रही थी उसका...

'जयंत'

'आन आह सॉरी मम्मी..'

सिमिरन ने उसकी नजरों का पीछा बकिया और रूबी पे जा रुकी..एक मुस्कान आ गयी ..सिमरन के चेहरे पे.दोस्ती को रिश्तेदारी में बदलने के अरमान जगह उठे...

.सिमिरन को उसे बुलाना ही पड़ा ...

तभी उसी वक्त राजेश के कदम अंदर पड़े और जैसे ही उसकी नज़र सुनील आदि पे पड़ी ..वो पलट गया वापस जाने के लिए .लेकिन.जिसका बर्तडे था..सुनीता..वो तो राजेश के इंतजार में पलकें बिछाए बैठी थी.बार बार उसकी नज़र दरवाजे पे ही जाती थी.की राजेश अब आया अब आया और जैसे ही उसने देखा की राजेश आ कर वापस पलट रहा है.वो चिल्ला पड़ी

रुक जाओ भाई...

राजेश के बढ़ते कदम वहीं जम हो गये..वो दुनिया का हर दुख झेल सकता था बस सुनीता की आँख में आँसू नहीं..पर होनी को कोन टाल सकता है..सुनील..

वो शाम भी अजीब थी, ये शाम भी अजीब है - भावनाओं का युद्ध - Emotional Saga

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